महाकाव्य 'महामानव' के रचनाकार — भारतीय संस्कृति, साहित्य एवं समाजसेवा के क्षेत्र में विगत पाँच दशकों से निरंतर समर्पित।
श्री उमाशंकर गुप्ता जी कानपुर, उत्तर प्रदेश के एक प्रतिष्ठित साहित्यकार, समाजसेवी एवं व्यापारी हैं। सन् 1967 में मात्र छह वर्ष की अवस्था में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से बाल स्वयंसेवक के रूप में जुड़कर उन्होंने अपनी सामाजिक यात्रा आरम्भ की।
साहित्य सृजन के साथ-साथ वे सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन एवं भारतीय संस्कृति के पुनर्स्थापन के लिए सतत प्रयासरत हैं। विगत चार दशकों में उन्होंने 500 से अधिक निर्धन परिवारों के सामूहिक विवाह संपन्न कराए हैं, जो उनकी असाधारण सामाजिक प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण है।
सन् 1967 से बाल स्वयंसेवक के रूप में संघ से जुड़कर, श्री गुप्ता जी ने विभिन्न स्तरों पर सांगठनिक दायित्वों का सफल निर्वहन किया है। मुख्य शिक्षक से लेकर जिला स्तरीय संपर्क एवं व्यवस्था प्रमुख तक — उनकी सेवा यात्रा अत्यंत प्रेरणादायक रही है।
शाखा स्तर
शाखा स्तर
मंडल स्तर
नगर स्तर
जिला स्तर
जिला स्तर
विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं में सक्रिय नेतृत्व
काव्य, इतिहास, गणित एवं दर्शन — विविध विषयों पर गहन लेखन
साहित्य एवं समाजसेवा के क्षेत्र में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मान
समाजसेवा, संस्कृति संरक्षण एवं साहित्य प्रचार-प्रसार के विविध कार्य
विगत 40 वर्षों में निर्धन परिवारों के 500 से अधिक जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न कराया
500+ जोड़े विवाहितराजर्षि उपन्यास की समीक्षात्मक भूमिका लेखन सहित अनेक साहित्यिक कृतियों पर विद्वत्तापूर्ण समीक्षा
भारतीय संस्कृति, दर्शन एवं राष्ट्रवाद के उत्कर्ष हेतु समसामयिक विषयों पर निरंतर प्रयास
लोक संस्कृति एवं पारंपरिक विरासत के पुनर्स्थापन हेतु सक्रिय योगदान एवं शोध कार्य
सामाजिक कुरीतियों एवं रूढ़ियों के उन्मूलन हेतु निरंतर जनजागरण अभियान
सिविल डिफेंस कानपुर के अवैतनिक पदाधिकारी के रूप में शासन-प्रशासन को दीर्घकालीन सहयोग
विभिन्न कार्यक्रमों, सम्मान समारोहों एवं साहित्यिक आयोजनों की झलकियाँ













निवास एवं संपर्क विवरण
119/456, दर्शनपुरवा, कानपुर — 208012 (उ.प्र.)
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